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3 Jun, 2025
शहरी तप्त द्वीप: भारत में प्रभावों को कम करने की रणनीतियां

By Mihir R. Bhatt, All India Disaster Mitigation Institute (AIDMI), India[1]

भारत में शहर गरम से गरमतर होते जा रहे हैं और उनमें रहने वाले लोग बेहाल। ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले यहां के शहरों में तापमान कहीं ज्यादा होता है और इसकी वजह है शहरों में घने बुनियादी ढांचे, ईंधन आधारित औद्योगिक विनिर्माण या परिवहन, सीमित वनस्पति और कंक्रीट और डामर जैसी ऊष्मा-अवशोषित सामग्री का बड़ी मात्रा में उपयोग। यही कारण है कि यहां शहरी तप्त द्वीपों (कम तापमान वाले गांवों से घिरे बेहद उच्च तापमान वाले शहर) की संख्या बढ़ती जा रही है और उनके दुष्प्रभावों से हमारा जीवन, आजीविका, सार्वजनिक स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और समग्र शहरी जीवन-यापन जोखिमभरा हो चुका है। इन जोखिमों को कम करने के लिए शहरों को चाहिए कि वे बड़े पैमाने पर स्थानीय,प्रकृति-आधारित, तकनीकी और नीति-संचालित समाधानों को समन्वित करें, लागू करें।

ठंडी और परावर्तक शहरी सतहें
डामर और काले सीमेंट से बनी पारंपरिक शहरी छतों की सतहें गर्मी को अवशोषित कर अपने में समेटे रखती हैं, जिससे शहरी तप्त द्वीप का प्रभाव और बढ़ जाता है। इन छतों को, सूर्य के प्रकाश को ज्यादा परावर्तित करने और गर्मी को कम अवशोषित करने के लिए डिजाइन की गई सामग्री से निर्मित, ठंडी छतों और ठंडे फुटपाथों से बदल कर सतह के तापमान को काफी कम किया जा सकता है।

उदाहरण के लिए, सफेद या हल्के रंग की छतें सौर विकिरण को परावर्तित करती हैं जिससे घर के अंदर का तापमान कम हो जाता हैं। इससेे घर को ठंडा रखने के लिए ऊर्जा की मांग कम हो जाती है। इसी तरह, पारगम्य फुटपाथ (छिद्रयुक्त फुटपाथ) न केवल गर्मी को परावर्तित करते हैं बल्कि सतही बहाव को भी कम करते हैं, जिससे शहरी बाढ़ को प्रबंधित करने में मदद मिलती है।

सतहों के इस तरह के परिवर्तन से नए कौशल और रोजगार भी पैदा हो सकते हैं।

गर्मी कम करने के लिए हरित तकनीकी नवाचार
उभरती हुई तकनीकें शहरी गर्मी को कम करने के कई नए अवसर प्रदान करती हैं। स्मार्ट सेंसर और रीयल-टाइम हीट मैपिंग से शहर तापमान में होने वाले बदलावों की निगरानी और गर्मस्थलों की पहचान की जा सकती है।

सौर या पवन या अन्य नवीकरणीय ऊर्जा के साथ काम करने वाली निष्क्रिय शीतलन प्रणाली (कम ऊर्जा के उपयोग से गर्मीे को नियंत्रित करने या बाहर निकाल देने वाली प्रणाली) और गर्मी प्रतिरोधी निर्माण सामग्री जैसी उन्नत शीतलन तकनीकें शहरी जलवायु सामथ्र्य को और बेहतर बना सकती हैं।

नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों, विशेष रूप से पवन और सौर ऊर्जा से चलने वाले शीतलन समाधानों का एकीकरण, बढ़ते तापमान के कारण होने वाली बढ़ी हुई ऊर्जा मांगों को पूरा करने में मदद कर सकता है।

जल-आधारित शीतलन उपाय
पानी गर्मी कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जल निकायों, फव्वारों और शहरी आर्द्रभूमि से आसपास के वातावरण को ठंडा करने में मदद मिलती है। शहर की झीलों और तालाबों को फिर से प्रतिष्ठित करना और नदी के किनारों को फिर से बनाना शहरों को ठंडा रखने का एक तरीका है।

शहर, गर्मी को कम करने के लिए वर्षा उद्यान, बायोस्वाल और प्रतिधारण तालाब ;त्मजमदेपवद च्वदकेद्ध जैसी परंपरागत/स्थिर जल प्रबंधन प्रथाओं को भी लागू कर सकते हैं और साथ ही तूफानी जल प्रबंधन में भी सुधार कर सकते हैं।

शहरी नियोजन में छायादार तटवर्ती क्षेत्रों का निर्माण करने वाली रणनीतियों को शामिल कर ठंडक भरे प्राकृतिक क्षेत्रों का निर्माण किया जा सकता है।

समुदाय-आधारित और नीति-संचालित शमन दृष्टिकोण
शहर तप्त द्वीप के प्रभावों को कम करने के लिए जरूरी है कि शहर के योजनाकारों, नीति निर्माताओं, व्यवसाइयों, शिक्षाविदों और समुदायों के बीच आपसी सहयोग हो। स्थानीय सरकारों को ऐसी नीतियां लागू करनी चाहिए जो हरित छतों, परावर्तक सामग्रियों और शहरी वानिकी कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करें। ताप कार्रवाई योजनाओं, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और जन जागरूकता अभियानों के जरिए समुदायों को ताप जोखिमों और उनसे निपटने के उपायों के बारे में शिक्षित किया जा सकता है।

शीतलन कारोबार योजनाएं, प्रारंभिक चेतावनी और उससे संबंधित कार्यवाहियां शहर को ठंडा रखने में सहायक होती हैं। जल स्रोत, शीतलन केंद्र, घर के इन्सुलेशन के लिए सब्सिडी और सस्ती शीतलन तकनीकों तक पहुँच प्रदान करके सरकारें कम-आय वाले समुदायों का भी सहयोग कर सकती हैं। ये समुदाय अक्सर अत्यधिक गर्मी के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं और इसलिए सबसे अधिक जरूरत मंद भी।

हरित अवसंरचना और शहरी वानिकी
पार्क, हरी छतें और पेड़ों से सजी सड़कें जैसे हरित स्थानों का विस्तार करना शहरी गर्मी को कम करने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है। वनस्पति छाया प्रदान करती है, गर्मी को अवशोषित करती है और वाष्पोत्सर्जन के माध्यम से हवा को ठंडा करती है।

शहरों में वृक्षारोपण पहल
बागवानी, फूलों की खेती, वन और अन्य किस्में – स्थानीय तापमान को काफी हद तक कम कर सकती हैं, साथ ही वायु की गुणवत्ता में सुधार और जैव विविधता को बढ़ा सकती हैं। इसके अलावा, घनी आबादी वाले क्षेत्रों में लंबाकार उद्यान और हरित दीवारें अधिकतम स्थान का उपयोग करते हुए आसपास के वातावरण को ठंडा कर सकती हैं।

ये उपाय रातों-रात नहीं किए जा सकते। पर पांच साल की योजना से इन उपायों को जमीन पर गहरे में उतारा जा सकता है। ये उपाय हरित कौशल, संपत्ति और नौकरियां भी पैदा करते हैं।

हीट-स्मार्ट-सिटी: डिजाइन और नियोजन
शहरों को इस तरह से डिजाइन किया जाना चाहिए कि वे ताप का अवशोषण कम करें और प्राकृतिक वेंटिलेशन ज्यादा हो। इसके लिए उन्हें फिर से डिजाइन करना पड़े तो वह भी किया जाना चाहिए।

छायादार पैदल मार्ग, इमारतों और सड़कों के लिए उच्च-अल्बेडो सामग्री (सूर्य के प्रकाश का ज्यादातर भाग परावर्तित कर देने वाली सामग्री) का उपयोग और कॉम्पैक्ट लेकिन अच्छी तरह से हवादार शहरी लेआउट गर्मी के संचय को कम करने में मदद कर सकता है।

खुली जगहें और हवादार गलियारे शहर को हीट स्मार्ट सिटी बनाते हैं। इस बनावट से खुले स्थानों पर हवा अपने आप बहती रहती है और अपने साथ गर्मी को भी बहा ले जाती है।

इसके अलावा, जलवायु-अनुकूलन भवन डिजाइनों को एकीकृत करके, जैसे कि इन्सुलेटेड दीवारें, क्रॉस-वेंटिलेशन, पर्याप्त वृक्षारोपण, उपयुक्त जल निकाय और ऊर्जा-कुशल निर्माण से भी अंदर के तापमान को कम किया जा सकता है।

निष्कर्ष
भारत में शहरी तप्त द्वीपों के प्रभाव को कम करने के लिए एक ऐसे बहुआयामी दृष्टिकोण की जरूरत है जो प्राकृतिक समाधानों, तकनीकी प्रगति और समुदाय-संचालित नीतियों को एक साथ लेकर चलता है/जोड़ता है।

हरित बुनियादी ढांचे, टिकाऊ शहरी नियोजन, जल प्रबंधन और तपश- अनुकूलन डिजाइन को प्राथमिकता देकर, शहर अपने आप को अपेक्षाकृत ठंडा और अधिक रहने योग्य बना सकते हैं।

जलवायु परिवर्तन, क्योंकि गर्मी से संबंधित चुनौतियों को लगातार बढ़ाता जा रहा है, इसलिए भारत के शहरों को शहरी गर्मी लचीलापन सुनिश्चित करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए सक्रिय और समावेशी रणनीतियां अपनाना जरूरी होगा।

 

[1] Presented at National Workshop on Proactive Heatwave Response: Charting a Path for Anticipatory Action and Community Resilience, March 11, 2025. For details on anticipatory actions, be in touch with Jyoti Agarwal at support@aidmi.org or look up AIDMI website (https://aidmi.org/). Hindi Translation by AIDMI.

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