By Vaishali Tiwari, AIDMI, India
भारत में बढ़ती गर्मी अब केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि मानवीय संकट का रूप ले चुकी है। विशेष रूप से छोटे व्यापारियों और अनौपचारिक क्षेत्र के कामगारों पर इसका प्रभाव अत्यधिक देखा जा रहा है। इसी संदर्भ में AIDMI (All India Disaster Mitigation Institute), अहमदाबाद द्वारा रीवा, मध्य प्रदेश में “Climate Risk Mitigation and Management” परियोजना चलाई जा रही है। इस परियोजना के अंतर्गत छोटे व्यवसायों पर आपदाओं के प्रभाव का आकलन, ग्रीन फंड का वितरण और जागरूकता सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
रीवा शहर के 5–6 प्रमुख स्थानों पर जाकर छोटे दुकानदारों से बातचीत की, जहां यह सामने आया कि गर्मी के मौसम में दोपहर के समय उन्हें काम करने में अत्यधिक कठिनाई होती है, जिससे उनके व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कई दुकानों पर न तो छाया की व्यवस्था है, न ही स्वच्छ पानी उपलब्ध है। अधिकांश व्यापारी गर्मी से निपटने के लिए आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं।
ग्रीन फंड के वितरण के साथ ही उन्हें यह समझाया गया कि इस धनराशि का उपयोग वे अपनी दुकानों को गर्मी के अनुकूल बनाने के लिए करें, जैसे छतरी लगवाना, वाटर कूलर लगाना, या बैठने की जगह पर छाया का प्रबंध करना। फंड वितरण के बाद लाभार्थियों की प्रगति की निगरानी की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे संसाधनों का सही उपयोग कर रहे हैं।
AIDMI द्वारा नियमित रूप से प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास सत्र आयोजित किए जाते हैं, जिससे स्थानीय लोग न केवल स्वयं की रक्षा कर सकें, बल्कि अपने समुदाय में भी जागरूकता फैला सकें। यह प्रयास भीषण गर्मी को केवल एक मौसम नहीं, बल्कि एक सामाजिक चुनौती के रूप में समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।