By Rohan Trivedi, AIDMI, India
नागालैंड आज भारत में आपदा प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में उभर रहा है। भौगोलिक दृष्टि से पर्वतीय और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति संवेदनशील यह राज्य भूस्खलन, बाढ़, वनाग्नि और अत्यधिक वर्षा जैसे जोखिमों से लगातार जूझता रहा है। ऐसे में राज्य सरकार और राष्ट्रीय संस्थानों के नेतृत्व ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण को केवल प्रतिक्रिया तक सीमित न रखते हुए, उसे शासन और विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है।
नागालैंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NSDMA), गृह विभाग, नागालैंड सरकार के नेतृत्व में संस्थागत सुदृढ़ीकरण, जोखिम-आधारित योजना और विज्ञान-आधारित निर्णय प्रक्रिया को प्राथमिकता दी गई है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के तकनीकी मार्गदर्शन से राज्य में आपदा प्रबंधन योजनाओं, मानक संचालन प्रक्रियाओं और अंतर-विभागीय समन्वय को मजबूत किया गया है। सूचना प्रणाली, प्रारंभिक चेतावनी तंत्र और विकेंद्रीकृत राहत व्यवस्था ने दूरस्थ क्षेत्रों तक समय पर सहायता पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
नागालैंड ने आपदा जोखिम हस्तांतरण, बीमा आधारित सुरक्षा, और डेटा-आधारित पूर्वानुमान जैसे नवाचारी उपायों को अपनाकर वित्तीय और संस्थागत लचीलापन बढ़ाया है। साथ ही, प्रशिक्षण, अभ्यास और ज्ञान साझेदारी के माध्यम से स्थानीय निकायों और समुदायों की क्षमता में निरंतर वृद्धि की गई है।
यह पहलें एक स्पष्ट उद्देश्य से प्रेरित हैं—जीवन, आजीविका और विकास को सुरक्षित रखना। नागालैंड का अनुभव दर्शाता है कि जब नेतृत्व, प्रणाली और विज्ञान एक साथ कार्य करते हैं, तब आपदा प्रबंधन केवल संकट प्रतिक्रिया नहीं रहता, बल्कि एक सुरक्षित, जलवायु-संवेदनशील और भविष्य के लिए तैयार राज्य की नींव बनता है।