By AIDMI Team, India
अत्यधिक गर्मी अब केवल मौसम की समस्या नहीं रही, बल्कि शहरों में गरीब, अनौपचारिक कामगारों, महिलाओं, बच्चों और कमजोर समुदायों के लिए गंभीर आपदा बन रही है। गर्मी बाढ़ या चक्रवात की तरह तुरंत दिखाई नहीं देती, लेकिन धीरे-धीरे स्वास्थ्य, आय, नींद, पानी, शिक्षा और जीवन की गरिमा पर असर डालती है।
Heat Action Plan को केवल चेतावनी तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इनमें पानी, छाया, ठंडक, सुरक्षित आवास, स्वास्थ्य सेवा और कामगार सुरक्षा को शामिल करना जरूरी है। राजकोट का उदाहरण बताता है कि जल सुरक्षा के बिना गर्मी से बचाव अधूरा है। दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद के अनुभव दिखाते हैं कि गर्मी गरीब बस्तियों, घरेलू कामगारों और अनौपचारिक महिला कामगारों पर सबसे अधिक असर डालती है।
कूलिंग स्टेशन, कूल रूफ, पानी, शौचालय, आराम की जगह, ORS और सोलर पंखे जैसे उपाय उपयोगी हो सकते हैं। नागरिक-आधारित निगरानी और कामगारों के अनुभवों को नीति में शामिल करना जरूरी है। स्थानीय समुदायों, महिला समूहों और कामगार संगठनों की भागीदारी से Heat Action Plan अधिक व्यवहारिक और न्यायपूर्ण बन सकते हैं।
यह भी जरूरी है कि गर्मी को सार्वजनिक स्वास्थ्य, श्रम सुरक्षा और शहरी नियोजन के मुद्दे के रूप में देखा जाए। केवल तापमान की जानकारी देना काफी नहीं है; लोगों तक समय पर सहायता, सुरक्षित स्थान और आर्थिक सुरक्षा भी पहुंचनी चाहिए। शहरी गर्मी से निपटने की शुरुआत सबसे जोखिमग्रस्त लोगों से होनी चाहिए।